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“रामायण” कितने प्रकार की है ?

“रामायण” कितने प्रकार की है ?

“रामायण” कितने प्रकार की है – संभवतः यह सूची भी पूर्ण नहीं हो- और भी रामायण हो सकती हैं-

वाल्मीकि रामायण ;
अध्यात्म रामायण ;
आनंद रामायण ;
वशिष्ठ रामायण ;
याज्ञवल्क्य रामायण ;
रामचरितमानस ;
कंब रामायण ;
कृत्तिवास रामायण ;
अद्भुत रामायण ;
तत्वार्थ रामायण ;
संजीवनी रामायण ;
सर्वार्थ रामायण ;
उत्तर रामचरितम् ;
प्रतिमानाटकम् ;
राघवेन्द्रचरितम् ;
हनुमन्नाटकम् ;
रघुवंशम् ;
अभिषेकनाटकम् ;
जानकीहरणम् ;
राधेश्याम रामायण के अतिरिक्त …

लोमश संहिता में रामायण ;
हनुमत् संहिता में रामायण ;
शुक संहिता ;
बृहत्कौशल खंड ;
भुशुण्डी रामायण ;
विलंका रामायण ( सारलादास कृत उड़िया ) ;
के साथ साथ …

दशरथ जातकम् ;
अनामक जातकम् ;
दशरथ कहानम् आदि (बौद्ध ग्रन्थों में रामायण ) ;

पउमचरिउ (21 ई.) ;
विमलसूरि कृत रामायण (प्राकृत में ) ;
रविवेषणाचार्य कृत रामचरित (संस्कृत में ) ;
स्वयंभू कृत् पउमचरिउ अपभ्रंश (नवम्, 21ई. ) ;
अभिनव पम्पकृत (कन्नड़ ) ;
रामचन्द्रचरित पुराण ( 1121ई. ) ;
गुणभद्र कृत् रामायण ( संस्कृत ) ;
उत्तरपुराण ( नवम् -21 ई. ) ;
जैन ग्रन्थों में रामायण के साथ-साथ …

हिंदी भाषा में 11 ;
मराठी भाषा में 8 ;
बांग्ला भाषा में 25 ;
तमिल भाषा में 12 ;
तेलगू भाषा में 12 ;
उड़िया लिपि में 6 रामायण प्राप्त हैं ।

“राम चरित शतकोटि अपारा” —-
सहस्रों करोड़ बार रामायण लिखी-गाई गई है ।

अन्य देशों के उदाहरण देखें , तो —

नेपाल में भानुभक्त कृत ” नेपाली रामायण ” ;

भूटान में पदमपाहुस रामायण ;

श्रीलंका में कुमारदास रचित ” जानकी हरण ” रामायण ( 512-521ई. ) ;
सिंहली भाषा में राम कथा ” मलेराज की कथा ” ( 700 bc ) ;

बर्मा में ” रामवत्थु ” रामायण ;

चीन में यूतोकी रामयागन ;
इंडोचीन क्षेत्र में खमैर रामायण ;

तुर्की में खोतानी रामायण ;

जावा में रामकैलिंग रामायण ;
सेरतराम रामायण ;
सैरीराम रामायण ;

थाईलैंड में रामकियैन रामायण ;

फिलीपींस की मारनव भाषा में संकलित ” मसलादिया लाबन ” , जो विकृत रामायण है ;

इंडोनेशिया में सबसे प्राचीन शास्त्रीय भाषा कावी में काकावीन द्वारा रचित ” रामायण काकावीन ” ;

कतर के दोहा में मुझ गल रामायण नाम से रामायण का अरेबिक अनुवाद , जिसे हमीदा बानो ने अनुवाद कराया था , जो 16 मई 1594 को पूर्ण हुआ था ;

मलेशिया के इस्लामीकरण के बाद 1633 में मलय रामायण की सबसे प्राचीन पांडुलिपि बोडलियन पुस्तकालय में संरक्षित कर दी गई थी । मलेशिया में ” हिकायत सेरीराम ” रामायण ;

जापान में कथा संग्रह ग्रन्थ ” होबुत्सुशू ” में रामकथा संकलित ;

मंगोलिया में अनेक रामायण प्राप्त हुई है । मंगोलियन भाषा में लिखित चार रामायण दम्दिन सुरेन ने खोजी थी । इनमें ” राजा जीवक की कथा ” सबसे प्रसिद्ध है । वर्तमान में लेनिनग्राद में मंगोलियन रामायण सुरक्षित है ।

तिब्बत में ” किंरस-पुंस-पा ” नाम से रामायण ;

इनके अतिरिक्त संसार भर से तीन सौ से अधिक रामायण प्राप्त हुई है ।

अन्त में पुनः ————-

” राम चरित शतकोटि अपारा।
श्रुति सारदा न बरने पारा ।।”

नानाविध रूपों में , अनेक देशों , अनेक भाषाओं में रामकथा का प्राप्त होना ही यह सिद्ध करता है कि श्रीराम सकल विश्व में व्याप्त हैं । यह केवल अवधपति श्रीराम जी के मन्दिर का शिलान्यास नहीं हो रहा , वरन् अखिल कोटि ब्रह्माण्ड नायक राजराजेश्वर प्रभु श्रीराम के मंदिर का शिलान्यास होने जा रहा है । इसीलिए 5 अगस्त , 2020 से प्रभु श्रीराम-मंदिर के निर्माण प्रारंभ होने के साथ ही पूरा विश्व अयोध्या की सीमा में सम्मिलित हो जाएगा और विश्व-प्रजा राघवेन्द्र भगवान की विधिवत् प्रजा बन जाएगी –

बोलो श्री राम दरबार की जय-

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